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Samastipur News: समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी में रचा इतिहास, सबसे कम उम्र में जड़ा अर्धशतक

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | समस्तीपुर के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी में इतिहास रच दिया। 15 साल 175 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाकर सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बने।

समस्तीपुर, 31 अगस्त 2026। बिहार के समस्तीपुर जिले से निकलकर भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना रहे युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने महज 81 गेंदों में 92 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी में 7 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ वैभव ने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

बेंगलुरु में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में वैभव ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से एक बार फिर यह साबित किया कि छोटी उम्र उनके क्रिकेटिंग आत्मविश्वास के आड़े नहीं आ रही है। 15 साल 175 दिन की उम्र में बनाया गया यह रिकॉर्ड समस्तीपुर के लिए भी गौरव का विषय है।

42 गेंदों में पूरी की फिफ्टी

वैभव ने अपनी पारी की शुरुआत से ही तेज बल्लेबाजी का रुख अपनाया। उन्होंने केवल 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। अर्धशतक तक पहुंचने के दौरान उनके बल्ले से 5 चौके और 3 छक्के निकले।

फिफ्टी पूरी करने के लिए वैभव ने सारांश जैन की गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाया। इसके बाद भी उन्होंने अपना आक्रामक अंदाज जारी रखा और 92 रन तक पहुंच गए। वह शतक से केवल 8 रन दूर थे, तभी हर्ष दुबे ने उनकी पारी का अंत कर दिया।

57 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

वैभव की इस उपलब्धि ने दलीप ट्रॉफी के रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया। उन्होंने 1969 में बनाए गए लक्ष्मण सिंह के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

लक्ष्मण सिंह ने 16 साल 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था। वैभव ने इससे कम उम्र में यह कारनामा करते हुए 57 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

इस सूची में वैभव के बाद लक्ष्मण सिंह और पीयूष चावला का नाम आता है। पीयूष चावला ने 2005 में 16 साल 307 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था।

ईस्ट जोन को मिली शानदार शुरुआत

वैभव ने ओपनिंग पार्टनर अभिमन्यु ईश्वरन के साथ मिलकर ईस्ट जोन को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच 161 रन की साझेदारी हुई। वैभव के आउट होने के बाद हालांकि ईस्ट जोन की पारी तेजी से बिखरने लगी।

हर्ष दुबे ने वैभव को पवेलियन भेजने के बाद अगली ही गेंद पर कुमार कुशाग्र को भी आउट कर दिया। इसके बाद अभिमन्यु ईश्वरन और सुदीप घरामी ने पारी संभालने की कोशिश की और 39 रन जोड़े।

लेकिन इसके बाद विकेटों का सिलसिला शुरू हो गया। आर्यन पांडे, यश ठाकुर और हर्ष दुबे ने ईस्ट जोन पर दबाव बढ़ाया और टीम ने अपने अंतिम 8 विकेट महज 66 रन के भीतर गंवा दिए।

दोनों टीमों की पहली पारी बराबर

सेंट्रल जोन ने अपनी पहली पारी में 266 रन बनाए थे। इसके जवाब में ईस्ट जोन भी 266 रन पर ऑलआउट हो गया। इस तरह पहली पारी के बाद दोनों टीमों का स्कोर बराबरी पर रहा।

सेंट्रल जोन की दूसरी पारी में भी शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। मुकेश कुमार ने शुरुआती साझेदारी तोड़ी, जबकि कप्तान रजत पाटीदार केवल 5 रन बनाकर बोल्ड हो गए। आर्यन जुयाल को मोहम्मद शमी ने पवेलियन भेजा।

दिन का खेल समाप्त होने तक सेंट्रल जोन ने दूसरी पारी में 43 रन पर 3 विकेट गंवा दिए थे।

कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर संभाली कमान

मुकाबले के दौरान ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन के दाएं हाथ की कलाई पर गेंद लगी थी। चोट के बाद उन्हें कुछ समय के लिए मैदान से बाहर जाना पड़ा।

ईशान की अनुपस्थिति में वैभव सूर्यवंशी ने करीब एक घंटे तक टीम की कप्तानी भी संभाली। लंच के आसपास वह स्टैंड-इन कप्तान की भूमिका में रहे। बाद में ईशान किशन मैदान पर वापस लौट आए।

DRS में भी वैभव की समझदारी

वैभव ने मैच के दौरान सिर्फ बल्ले से ही प्रभाव नहीं छोड़ा, बल्कि मैदान पर अपनी क्रिकेटिंग समझ का भी परिचय दिया। सेंट्रल जोन के आर्यन जुयाल जब 46 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, उस समय ईस्ट जोन की अपील पर वैभव ने रिव्यू के पक्ष में अपना समर्थन दिया।

रिव्यू में ईस्ट जोन का फैसला सही साबित हुआ। इतनी कम उम्र में वैभव का बल्लेबाजी के साथ मैदान पर इस तरह सक्रिय रहना उनके बढ़ते क्रिकेटिंग कौशल को दिखाता है।

क्वार्टर फाइनल में गेंद से भी किया था कमाल

दलीप ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में वैभव का बल्ला ज्यादा नहीं चला था। उन्होंने केवल 8 रन बनाए थे, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने 11 रन देकर 2 विकेट हासिल किए थे।

ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था। सेमीफाइनल में वैभव ने बल्ले से जोरदार वापसी करते हुए 92 रन की पारी खेली।

2026 में छक्कों की बारिश

वैभव सूर्यवंशी के लिए 2026 का साल लगातार उपलब्धियों से भरा रहा है। टी-20, वनडे और रेड-बॉल क्रिकेट में वह अपनी बल्लेबाजी का प्रभाव छोड़ रहे हैं।

सभी फॉर्मेट और सभी मैचों को मिलाकर इस साल वैभव के नाम 161 छक्के दर्ज हैं। इनमें IPL 2026 के दौरान लगाए गए 72 छक्के भी शामिल हैं। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल 150 से ज्यादा छक्के लगाने वाले वह इकलौते बल्लेबाज हैं।

रयान रिकल्टन और फिन एलन 99-99 छक्कों के साथ इस सूची में उनके पीछे हैं। मिचेल मार्श ने 95 और ईशान किशन ने 89 छक्के लगाए हैं।

41 मैचों में 2022 रन

2026 में वैभव ने इंडिया अंडर-19, इंडिया ए, भारतीय टीम, राजस्थान रॉयल्स और दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व किया है। 41 मैचों की 41 पारियों में उनके खाते में 2022 रन दर्ज हैं। इस दौरान उन्होंने 3 शतक और 14 अर्धशतक लगाए हैं।

समस्तीपुर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे वैभव के प्रदर्शन पर अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर लगातार बनी हुई है। कम उम्र में लगातार बड़े स्तर पर खेलने और रिकॉर्ड बनाने की उनकी क्षमता उन्हें भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारों में शामिल कर रही है।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट का रिकॉर्ड अभी अलग

दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भले ही अब वैभव के नाम हो गया है, लेकिन भारतीय फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक और शतक लगाने का रिकॉर्ड ध्रुव पांडोव के नाम दर्ज है।

ध्रुव पांडोव ने 13 साल 10 महीने की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अर्धशतक लगाया था। उन्होंने 14 साल 293 दिन की उम्र में पंजाब के लिए जम्मू-कश्मीर के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में शतक भी लगाया था।

पांडोव का क्रिकेट करियर हालांकि बेहद कम उम्र में समाप्त हो गया। 31 जनवरी 1992 को अंबाला में सड़क हादसे में 18 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई थी। उन्होंने पंजाब के लिए 23 फर्स्ट क्लास मैचों में 1,090 रन बनाए थे, जिसमें 2 शतक और 6 अर्धशतक शामिल थे।

दूसरे सेमीफाइनल में तिलक वर्मा का शतक

दलीप ट्रॉफी के दूसरे सेमीफाइनल में साउथ जोन और नॉर्थ जोन के बीच मुकाबला चल रहा है। नॉर्थ जोन ने पहली पारी में 195 रन बनाए थे। जवाब में साउथ जोन ने शुरुआती विकेट गंवाए, लेकिन तिलक वर्मा और श्रेयस गोपाल ने पारी को संभाल लिया।

दोनों के बीच 175 रन की साझेदारी हुई। गोपाल 88 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन तिलक वर्मा ने एक छोर संभाले रखा और शतक पूरा किया। दिन का खेल खत्म होने तक साउथ जोन ने नॉर्थ जोन पर 90 रन की बढ़त बना ली थी।

IPL के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर भी चर्चा

इसी बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने IPL की सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर राय मांगी है। टीमों से 31 अगस्त तक अपनी राय देने को कहा गया है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया पहले ही संकेत दे चुके हैं कि IPL 2026 के बाद इस नियम की समीक्षा की जा सकती है।

समस्तीपुर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए वैभव की यह पारी इसलिए भी खास है क्योंकि जिले से निकला यह युवा खिलाड़ी लगातार बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहा है। दलीप ट्रॉफी में 15 साल की उम्र में रिकॉर्ड बनाना उनके तेजी से आगे बढ़ते क्रिकेट करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है।

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जनहित टिप्पणी

समस्तीपुर जैसे जिले से निकलकर देश के बड़े क्रिकेट मंचों तक पहुंचना वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और मेहनत की बड़ी मिसाल है। दलीप ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट में इतनी कम उम्र में रिकॉर्ड बनाना बताता है कि वैभव ने कम समय में अपने खेल को किस स्तर तक विकसित किया है।

उनकी 92 रन की पारी केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि जिले के उन तमाम युवा क्रिकेटरों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। खास बात यह है कि वैभव केवल टी-20 क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं। वह रेड-बॉल क्रिकेट में भी खुद को साबित कर रहे हैं।

हालांकि क्रिकेट में लंबा सफर तय करने के लिए निरंतरता सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में वैभव के लिए फिटनेस, तकनीक, मानसिक मजबूती और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। समस्तीपुर के खेल प्रेमियों की उम्मीद अब इस युवा प्रतिभा से और बढ़ गई है।

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